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गिलोय के फायदे

Last updated on: March 17th, 2021

गिलोय के फायदे | Benefits of Giloy in Hindi

गिलोय के फायदे | Benefits of Giloy in Hindi

कोरोना काल में आयुर्वेद ने दुनिया की बहुत सी मदद की। आयुर्वेदिक नुस्खों ने दुनिया को इस खतरनाक बीमारी से बचाने में पूरा सहयोग प्रदान किया । वैसे तो आयुर्वेदिक औषधियां अपने आप में प्रबल और गुणकारी होती है । लेकिन इन औषधियों में गिलोय की अपनी एक अलग पहचान है । गिलोय एक बेल है जो ज्यादातर जंगलों और झाड़ियों में पाई जाती है । भारत के आयुर्वेदिक इलाज पद्धति में इसका इस्तेमाल बहुत ही पुराने समय से किया जा रहा है। कोरोना काल और हाल के कुछ वर्षों में आई आयुर्वेद के प्रति जागरूकता के कारण लोगों में इसकी लोकप्रियता और जागरूकता बढ़ गई है । अब लोग इस बेल को अपने घरों में लगाना भी पसंद करते हैं।

मॉडर्न साइंस में इसे Tinospora Cordifolia नाम के साथ जाना जाता है और यह Menispermaceae फैमिली से नाता रखती है। इस बेल को गुडूची, अमृतवल्ली, गुलवेल, ग्लो आदि नामों से भी जाना जाता है। इसकी एक सबसे अलग पहचान है और वह पहचान है इसके पत्ते। इसके पत्ते पान के पत्तों की तरह बड़े आकार के होते हैं । यह छूने में चिकने और गहरे हरे रंग के होते हैं । इसकी बेल की एक अलग पहचान होती है। इसकी बेल को काटने से अंदर अलग तरीके के डिजाइन दिखाई देते हैं। आयुर्वेदिक मत के अनुसार गिलोय जिस पेड़ पर चढ़ती है उस पेड़ के गुणों को भी अपने अंदर समाहित कर लेती है। जैसे कि अगर कोई गिलोय की बेल नीम के पेड़ के ऊपर चढ़े तो उसमें नीम के पेड़ के गुण भी समा जाते हैं और ऐसी गिलोय को नीम गिलोय भी कहा जाता है।



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इसका एक नाम अमृता भी है। ‘अमृता’ नाम अमृत शब्द से पड़ा है जिसका अर्थ है कि इसके औषधीय गुण अमृत के समान है और गिलोय बहुत सी बीमारियों को ठीक करने में सक्षम है । यह इम्यूनिटी बढ़ाती है और शरीर से कीटाणु बाहर निकालती है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स का एक पावर हाउस है जो शरीर को फ्री रेडिकल्स के साथ लड़ने में सहायता करता है।

इस औषधि का इस्तेमाल बुखार से लेकर पाचन क्रिया तक की सब बीमारियों में होता है। इसमें ग्लूकोसाइड और टीनोस्पोरिक एसिड मौजूद है। इसमें बहुत मात्रा में कॉपर, आयरन, फास्फोरस, जिंक, कैल्शियम और मैंगनीज भी मौजूद है जो इसे एक सर्वोत्तम औषधि बनाता है । यह हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बहुत मदद करती है। इसकी तासीर को गर्म माना जाता है। इसका स्वाद हल्का कड़वा और हल्का झनझनाहट करने वाला होता है। गिलोय को बहुत से तरीकों के साथ खाया जा सकता है । कुछ लोग इसका जूस पीना पसंद करते हैं कुछ लोग इसको वटी अथवा गोली के रूप में खाना पसंद करते हैं तो कुछ लोग इसका चूर्ण भी लेते हैं । आजकल बाजार में बहुत से ब्रांड के गिलोय सत्व आदि भी मौजूद है।



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गिलोय के फ़ायदे

डायबिटीज में रामबाण:- आयुर्वेदिक विशेषज्ञ गिलोय को हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट के रूप में बेहतरीन मानते हैं और यह भी साबित हुआ है कि यह टाइप -2 डायबिटीज को कंट्रोल करने में काफी अहम काम करती है। इसका जूस पीने से शुगर का बढ़ा हुआ लेवल कम हो जाता है और शरीर में इंसुलिन का स्त्राव बढ़ता है। यह शरीर में इंसुलिन रजिस्टेंस को कम करती है । इस प्रकार यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत ही उपयोगी है। डायबिटीज के मरीज इसका सेवन दो अलग तरीके से कर सकते हैं । वह चाहे तो दिन में 2-3 चम्मच जूस एक कप पानी में अच्छे से मिलाकर पी सकते हैं । अन्यथा आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन कर सकते हैं।

डेंगू का उपचार:- डेंगू की बीमारी का इलाज करने में बहुत से घरेलू नुस्खे इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन इन सब में गिलोय का सेवन करना अत्यधिक फायदेमंद और कारगर नुस्खा माना गया है। यह देखा गया है कि इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को तेज बुखार आने लगता है। गिलोय के अंदर बुखार को कम करने वाले गुण मौजूद है। अंग्रेजी भाषा में इसे एंटीपायरेटिक प्रॉपर्टी बोला जाता है। यह व्यक्ति की इम्युनिटी को बढ़ाकर बुखार से लड़ने की ताकत प्रदान करती है जिससे डेंगू जल्दी ही खत्म हो जाता है।

लीवर की सफ़ाई:- गिलोय लिवर की सफाई करने में काफी सहायक होता है। आयुर्वेद इसे रसायन द्रव्यों की श्रृंखला में शामिल करता है। यह द्रव्य इम्यूनिटी सिस्टम में बहुत जल्द सुधार करते हैं और शरीर के वाइट सेल्स की काम करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। यह शरीर में बैक्टीरिया से पैदा होने वाले रोगों की रोकथाम करते हैं। कई बार ज्यादा शराब पीने से लीवर को बहुत नुकसान पहुंचता है। ऐसी परिस्थिति में गिलोय सत्व का सेवन करने से लिवर को काफी फायदा होता है । इस तरीके से यह शरीर में लीवर की सफाई कर उसके काम करने की क्षमता को बढाती हैं।

गठिया का उपचार:- बहुत से अध्ययनों के बाद पता चला है कि गिलोय गठिया जैसी घातक बीमारी को ठीक करने में काफी कारगर सिद्ध हुआ है। इसमें मौजूद पोषक तत्व जॉइंट कार्टिलेज की मोटाई को बढ़ाकर ओस्टियोजेनिक इफ़ेक्ट को बढ़ाते हैं। जिससे कि गठिया की बीमारी में काफी राहत मिलती है। गठिया की बीमारी में गिलोय का इस्तेमाल शुंठी ( सूखे अदरक का चूर्ण) के साथ करने की सलाह दी जाती है।

एनीमिया में गिलोय के फ़ायदे:- एनीमिया का अर्थ होता है शरीर में खून की कमी । शरीर में खून की कमी हो जाने से बहुत से अन्य रोग उत्पन्न होने लगते हैं । यह दिक्कत आमतौर पर महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है ।ऐसे में गिलोय का रस काफी मददगार होता है ।

दिन में 2-3 चम्मच गिलोय जूस शहद अथवा पानी के साथ पीने पर यह शरीर में से खून की कमी (रक्त अल्पता) को दूर करता है एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

स्किन प्रॉब्लम में फायदे:- ऐसा कई अध्ययनों में पाया गया है कि गिलोय त्वचा संबंधी रोगों एवं एलर्जी को दूर भगाने में काफी सहायक होता है। गिलोय में पाए जाने वाले पोषक तत्व चेहरे पर होने वाले कील मुंहासे और दागों को ठीक करने में मदद करते हैं। त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति पाने के लिए गुडुची(गिलोय) के तने को पीसकर इसका लेप बनाकर मुहांसों वाली जगह पर लगाने से त्वचा पर हुए मुहांसे आदि दूर हो जाते हैं।

फेफड़ों संबंधी रोग:- कई बार पलूशन, धूल-मिट्टी होने की वजह से सांस से संबंधित रोग पैदा हो जाते हैं। गिलोय के anti-inflammatory गुण होने की वजह से यह शरीर में अधिक मात्रा में बनने वाली कफ को कंट्रोल करती है । शरीर की इम्यूनिटी पावर को बढ़ावा देती है। जिससे होने वाले अस्थमा, खांसी आदि रोगों से बचाव होता है तथा फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। अस्थमा का घरेलू उपचार करने के लिए गिलोय चूर्ण को यदि मुलेठी चूर्ण में मिलाकर शहद के साथ दिन में 2-3 बार सेवन किया जाए तो इससे सांसो से जुड़ी समस्या काफी हद तक ठीक होने लगती है।

तो अब तक हमने गिलोय से होने वाले लाभ के बारे में जाना है, आयुर्वेदिक मत के अनुसार गिलोय का जरूरत से ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करना नुकसानदेह भी हो सकता है। इसलिए गिलोय का अधिक मात्रा में उपयोग करने के नुकसान से भी परिचित करवाना हमारा कर्तव्य है।



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गिलोय के नुकसान

‘अति सर्वत्र वर्जयते’ इस श्लोक का मतलब है कि जरूरत से ज्यादा किसी वस्तु का होना नुकसान दायक भी हो सकता है।

इसलिए अब आप गिलोय के फायदे और नुकसान दोनों से परिचित हैं। इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से ही इसका इस्तेमाल करें कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूर ले।

Author:

Geeta Verma Malhotra
M.Pharmacy(Ayurved)
Lovely Professional University, Punjab

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