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साईं बाबा की जीवनी

Last updated on: April 29th, 2021

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साईं बाबा की जीवनी | Sai Baba Biography | Jivani | Jivan Parichay | Life History | Information in Hindi

साईं बाबा की जीवनी | Sai Baba Biography in Hindi

साईं बाबा जो शिरडी के साईं बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं एक अध्यात्मिक गुरु, योगी और फकीर थे। जिन्होंने शिरडी में हिंदू-मुस्लिम धर्म की एकता का प्रसार किया तथा सबका मालिक एक का नारा दिया। साईं बाबा के जीवन में कई प्रकार के चमत्कारों का भी उल्लेख किया जाता है यही वजह है कि उनको मानने वालों की एक बहुत बड़ी संख्या है।

आइए जानते हैं साईं बाबा के जीवन के बारे में-

नामसाईबाबा
अन्य नामशिरडी वाले साईं बाबा
पेशाआध्यात्मिक गुरु, योगी, फकीर
जन्म तिथि28 सितंबर 1838
जन्म स्थानज्ञात नहीं
मृत्यु तिथि15 अक्टूबर 1918
मृत्यु स्थानशिरडी, महाराष्ट्र
वैवाहिक स्थितिअविवाहित
साईं बाबा की जीवनी | Sai Baba Biography | Jivani | Jivan Parichay | Life History | Information in Hindi

साईं बाबा का शुरुआती जीवन

साईं बाबा ने 28 सितंबर 1838 में महाराष्ट्र के पाथरी गांव में जन्म लिया। हालांकि अभी भी उनके जन्म स्थान को लेकर विवाद जारी है। उनके माता-पिता के बारे में कोई तथ्य हासिल नहीं है। सत्चरित्र किताब में उनकी सबसे पहली जानकारी सिडनी गांव से मिलती हैं। जानकारी के मुताबिक जब वे 16 साल के थे तब अहमदनगर जिले में स्थित शिरडी गांव में आए थे।

वह वहां एक नीम के वृक्ष के नीचे बैठे तपस्या करते रहते थे जिसे देखकर आसपास के लोग काफी हैरान होते थे। कि इतना छोटा बालक आखिर कैसे इतनी कठोर तपस्या कर सकता है। साईं बाबा ने अपनी तपस्या से कई धार्मिक लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। हालांकि कई लोग ऐसे भी थे जो उन्हें पागल कह कर पत्थर मारा करते थे। ऐसे ही दिन बीतते रहे और एक दिन साईं बाबा गांव से लापता हो गए। इस घटना के कुछ समय बाद शिरडी में साईं बाबा चांद पाटिल नामक व्यक्ति की बारात के साथ वापस आ जाते हैं।



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साईं बाबा की शिरडी में वापसी

साईं बाबा 1858 में शिरडी वापस आ जाते हैं। लेकिन वह बिल्कुल एक नए रंग रूप में दिखाई देते हैं। दरअसल उन्होंने अपनी वेशभूषा में बदलाव किया होता है वह अपने घुटने तक एक कफनी बागा पहन लेते हैं तथा सर पर एक कपड़े की टोपी बांधे रखते हैं। इस संबंध में उनके भक्त रामगीर बुआ बताते हैं कि जब साईं बाबा पहली बार शिरडी पहुंचे थे तब उन्होंने खिलाड़ियों की तरह कपड़े पहने थे तथा उनके कमर तक लंबे बाल थे। उनके कपड़ों से प्रतीत हो रहा था कि वह कोई सूफी संत है जिस वजह से गांव के लोग उन्हें मुस्लिम फकीर समझा करते थे। गांव में हिंदुओं की भरमार थी जिस वजह से उनका सत्कार नहीं किया गया।

उन्होंने शिडनी के नीम के पेड़ के नीचे 5 साल बिताए जिसके बाद वह एक जर्जर मस्जिद में रहने लगे। मस्जिद में रहते हुए ही लोग उन्हें भिक्षा दिया करते थे। वे मस्जिद में धूनी जलाते थे जिससे निकली राख भी उन लोगों को दिया करते थे। ऐसी मान्यता है कि उस राख में चिकित्सीय शक्तियां थी। जिससे कई तरह की बीमारियां दूर हो जाती थी। जो भी साईं बाबा से मिलता था वह उन्हें हिंदू ग्रन्थों के साथ-साथ कुरान भी पढ़ने की हिदायत देते थे।

धीरे-धीरे साईं बाबा को कई लोग जानने लगे तथा 1910 तक वे मुंबई में प्रसिद्ध हो गए। उन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता को बनाए रखने के लिए सबका मालिक एक का नारा दिया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन काल में हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों को माना। वे हमेशा कहते थे कि, “मुझ पर विश्वास करो तुम्हारी प्रार्थना का उत्तर दिया जाएगा।” हमेशा उनकी जबान में अल्लाह मालिक शब्द रहता था।



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साईं बाबा के चमत्कार

साईं बाबा के सम्बंध में उनके द्वारा किए गए कई चमत्कारों का जिक्र किया जाता है जो कि निम्नलिखित हैं:-

कहा जाता है कि एक बार साईं बाबा ने अपने चमत्कारों से पानी से दिया जला दिया था। दरअसल वे जिस मस्जिद में रहते थे तथा आसपास के मंदिरों में रोजाना दिया जलाते थे। लेकिन इसके लिए उन्हें बनियों से तेल लेना पड़ता था। रोज-रोज फ्री में तेल देकर बनिए थक चुके थे तथा उन्होंने एक दिन साईं बाबा को तेल देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि तेल खत्म हो चुका है बाबा बिना कुछ कहें वहां से चले गए और अपने मस्जिद वापस आए। उन्होंने वहां पड़े मिट्टी के दीयों में पानी भरा और उससे दिया जला दिया। यह दिया आधी रात तक जलता रहा। जब इस बात का पता बनियों को चला तो वह दौड़ते भागते साईं बाबा से माफी मांगने पहुंचे। साईं बाबा ने उन्हें दोबारा झूठ ना बोलने की हिदायत देकर माफ कर दिया।

साईं बाबा ने तो एक बार मूसलाधार बारिश को रोक दिया था। दरअसल उनके भक्त रायबहादुर अपने पत्नी के साथ साईं बाबा से मिलने शिर्डी पहुंचे। जब वे घर जा रहे थे तब मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। साईं बाबा ने प्रार्थना की कि ‘हे अल्लाह, बारिश को रोक दो, मेरे बच्चे घर जा रहे हैं उन्हें शांति से घर जाने दो’ जिसके बाद अचानक बारिश बंद हो जाती है तथा उनके भक्त वापस घर लौट जाते हैं।

साईं बाबा ने एक बच्चे को भी कुएं में डूबने से बचाया था। जब 3 साल की एक बच्ची 1 दिन कुएं में गिर गई तब गांव वाले उसे बचाने पहुंचे तो देखा बच्ची हवा में तैर रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कोई हाथ उसे कुएं में गिरने से रोकने के लिए पकड़ रखा हो। बता दे वह बच्ची साईं बाबा को बहुत ही प्रिय थी वह हमेशा कहा करती थी कि वे साईं बाबा की बहन है। हालांकि इस चमत्कार को लेकर कोई स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं है।

साईं के दरबार में एक दिन एक लक्ष्मी नामक स्त्री पहुंचती है और उनसे विनती करती हैं कि उसे संतान सुख प्रदान किया जाए। साईं इस बात पर उन्हें उदी यानी की भभूत देते हैं और कहते हैं कि थोड़ा भभूत खुद खाए व थोड़ा अपने पति को खिलाएं जिसके बाद लक्ष्मी को संतान सुख की प्राप्ति होती है। लेकिन जब वह गर्भवती होती है उस दौरान उसे उसी के किसी दुश्मन द्वारा बच्चा नष्ट करने वाली दवाई दे दी जाती है। जिसके बाद लक्ष्मी का रक्तस्त्राव होने लगता है और वे साईं के दरबार पर पहुंचती है साईं फिर उसे भभूत देते हैं जिसे खाते ही लक्ष्मी का रक्तस्त्राव रुक जाता है और उसे सही समय पर संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके बाद से ही लक्ष्मी जहां भी जाती थी साईं बाबा का गुणगान करती नहीं थकती।



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साईं बाबा की मृत्यु

साईं बाबा की मृत्यु 15 अक्टूबर 1918 को हुई उन्होंने अपना अंतिम समय शिरडी में ही बिताया जिस वक्त उनकी मृत्यु हुई इस दौरान उनकी आयु 80 वर्ष थी। अपने पीछे उन्होंने कोई अध्यात्मिक वारिस नहीं छोड़ा। हालांकि ऐसा बताया जाता है कि उनके अनुयायी उनकी अनुपस्थिति में उनकी आरती किया करते थे।

साईं बाबा के मंदिर

साईं बाबा आंदोलन उस दौरान शुरू हुआ जब साईं शिर्डी में निवास करते थे। 19वीं सदी तक उनके अनुयायियों में शिरडी के आसपास के गांव के लोग शामिल थे उनका सबसे पहला भक्त खंडोबा पुजारी म्हाळसापती था। साईं बाबा का सबसे पहला मंदिर शिवपुरी में है वही शिरडी साईं बाबा मंदिर में हर दिन 20000 से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। त्योहारों के समय तो उनकी संख्या लाखों तक हो जाती है। आपको बता दें उन्हें मुख्यतः उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा गुजरात में पूजा जाता है। 2012 में तो एक अज्ञात श्रद्धालु द्वारा शिर्डी मंदिर में 11.8 करोड़ रुपए चढ़ाए गए थे।



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Author:

भारती, मैं पत्रकारिता की छात्रा हूँ, मुझे लिखना पसंद है क्योंकि शब्दों के ज़रिए मैं खुदको बयां कर सकती हूं।

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