लता मंगेशकर की जीवनी

Last updated on: February 18th, 2021

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लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Jivan Parichay Biography in Hindi

लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Biography in Hindi

नामलता मंगेश्कर
व्यवसायपार्श्वगायन (Singer)
जन्म तिथि28 सिंतबर, 1929
राष्ट्रीयताभारतीय
लंबाई155 से.मी
वजन65 किलोग्राम
राशितुला
वैवाहिक स्थितिअविवाहित
गृह राज्यमुंबई
जन्म स्थानमध्यप्रदेश,इंदौर
माता का नामशेवंती मंगेशकर
पिता का नामदीनानाथ मंगेशकर
बहनों के नामऊषा मंगेशकर, आशा भोंसले, मीना
भाई का नामहृदयनाथ मंगेशकर
उम्र91 years (2020)
लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar Jivan Parichay Biography in Hindi

लता मंगेशकर का प्रारंभिक जीवन

लता मंगेशकर ऐसी शख़्सियत हैं जो पहचान की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने छह दशकों से ज्यादा समय तक गीत गाए तथा लोगों तक उनका संचार किया। यह छह दशक उनके जीवन की अवधि में उपलब्धियों से भरे पड़े हैं।

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 में मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में पैदा हुई। लता का पूरा नाम हेमा मंगेशकर था, बाद में उन्हें ‘कुमारी लता दीनानाथ मंगेशकर’ के नाम से जाना गया। लता मंगेशकर के पिता रंगमंच के क्षेत्र में एक गायक थे.

तथा वह भी चाहते थे कि लता भी संगीत के क्षेत्र में काम करें। इसलिए जब लता 5 साल की हुई तभी उन्होंने लता और उनकी तीनों बहनों को शास्त्रीय संगीत पढ़ने भेजा।

लेकिन इनमें सबसे बड़ी बात यह थी कि लता के पास सुरीली आवाज और अभिव्यक्ति के पर्याप्त अवसर थे। और यही अवसर आगे चलकर लता के लिए महत्वपूर्ण सफलता ले आया। इन्हीं विशेषताओं और प्रतिभा की वजह से लता मंगेशकर अभिनय के क्षेत्र में आई।

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लेकिन सन 1942 में लता के साथ ऐसा घटना घटी जिससे वह पूरी तरह से टूट गई। दरअसल, साल 1942 में लता के पिता की मृत्यु हो गई। उस वक्त लता की आयु सिर्फ 13 वर्ष थी।

लेकिन उनके पिता के दोस्त मास्टर विनायक उनके लिए फ़रिश्ते बन कर आए तथा उन्होंने लता के पिता के गुज़र जाने के बाद पूरे परिवार को संभाला तथा लता मंगेशकर को एक सिंगर बनाने में कड़ी मेहनत की। गायन के क्षेत्र में सफलता के लिए लता को कई विपरीत परिस्थितियों से लड़ना पड़ा।

कई बार तो लता को सुरीली आवाज होने की वजह से कई फिल्मकारों ने उन्हें नौकरी ही नहीं दी। लेकिन उन्होंने अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर वह अपने आपको गायन के क्षेत्र में काबिज़ कर पाई।

बता दें, जब लता मंगेशकर ने गायन शुरू किया था तो उस समय के कई प्रसिद्ध गायक मौजूद थे जिनमें नूरजहां भी शामिल हैं। लेकिन धीरे-धीरे लता मंगेशकर ने अपनी खुद की शैली विकसित की।

इसके लिए उन्होंने हिंदी और उर्दू में उच्चारण सीखा और बाद में वह अपनी शैली में काम करने की वजह से ही पॉपुलर हुई।

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लता मंगेशकर का करियर को लेकर संघर्ष

लता आज जिस मुकाम पर हैं, उस मुकाम में पहुंचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है। कई जगहों पर उनकी पतली आवाज की वजह से उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। लेकिन सन 1947 में लता जी की प्रतिभा को पहचाना गया।

दरअसल, उस समय उन्होंने फिल्म “आपकी सेवा में” का एक गीत गाया था जिससे लता को फिल्मी जगत में एक पहचान मिली। इसके बाद उनके पास एक से एक गाने के ऑफर आए। धीरे-धीरे उनके फैंस की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई।

अपने करियर को हासिल करने का सबसे ज्यादा श्रेय वह गुलाम हैदर को देती हैं जिन्हें वे अपना मेंटर मानती हैं। इस संबंध में लता ने बताया कि, हैदर लता की प्रतिभा को पहले ही पहचान चुके थे वह फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी के पास ‘शहीद’ नामक फिल्म में लता को लेने की सिफारिश करने लगे। लेकिन मुखर्जी ने यह कहकर लता को रिजेक्ट कर दिया कि उनकी आवाज काफी पतली है।

इस घटना से हैदर भड़क गए और कहा कि आगे आने वाले कुछ समय मे उनके जैसे डायरेक्टर लता के आगे पीछे भागेंगे और ऐसा ही हुआ। आने वाले कुछ दिनों में ही लता ने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली।

लता ने अब तक कई सारे गाने गाए है खुद लता को ही नहीं मालूम कि इनकी संख्या क्या है। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी लता मंगेशकर का नाम शुमार है। माना जाता है कि लता मंगेशकर ने अब तक 25,000 से 30,000 तक के गाने गाए हैं।

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लता मंगेशकर को लेकर विवाद

लता मंगेशकर ऐसी शख़्सियत नहीं है जो विवादों में रहे। लता मंगेशकर कभी भी गंभीर विवादों के घेरे में नहीं रही। हालांकि उन्हें लेकर छोटे-मोटे विवादों के बारे में पता चलता है, लेकिन यह विवाद कम मनमुटाव ज्यादा प्रतीत होते है।

दरअसल सचिन देव बर्मन से लता मंगेशकर का मनमुटाव हुआ जिसके बाद से उन्होंने सचिन के साथ 5 साल तक काम नहीं किया। इसके अलावा ओ पी नैयर और श्री रामचंद्र के साथ भी लता मंगेशकर का एक मामूली सा विवाद रहा। इसी तरह मोहम्मद रफी और लता के बीच गानों की रॉयल्टी को लेकर कभी सहमति नहीं बन पाई।

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लता मंगेशकर को जान से मारने की कोशिश

आपको जानकर हैरानी होगी कि लता मंगेशकर को जान से मारने की कोशिश की गई थी। यह घटना साल 1962 में घटी थी। जब एक सुबह उठते ही लता के पेट में ज़ोर से दर्द होने लगा। इस जबरदस्त दर्द की वजह से वह हिलने-डुलने की स्थिति और खड़े होने की स्थिति में नहीं थी।

बाद में, जांच में सामने आया कि लता मंगेशकर को किसी ने स्लो पॉइजन दे दिया था तथा उन्हें जान से मारने की कोशिश की थी। लेकिन तब से लेकर आज तक ऐसा किसने किया इस बात का पता नहीं चला।

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लता मंगेशकर को मिले अवार्ड्स

  1. फिल्म परिचय के गाने के लिए लता को सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार मिला जो कि 1972 में दिया गया।
  2. इसी के साथ 1974 में फिल्म कोरा कागज में लता मंगेशकर को सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार मिला।
  3. 1959 लता को सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार दिया गया।
  4. 1970 का सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार
  5. 1990 में पार्श्व गायिका का पुरस्कार, यह फ़िल्म ‘लेकिन’ के गीतों के लिए दिया गया।
  6. सन 1994 में फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त हुआ।
  7. 1994 में फ़िल्म हम आपके हैं कौन के गीत “दीदी तेरा देवर दीवाना’’ लिए पुरस्कार दिया गया।
  8. 1969 में लता को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
  9. 1989 में उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया।
  10. सन 1997 में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से भी सम्मानित किया गया।
  11. 1999 में उन्हें पदम् विभूषण से सम्मानित किया गया।
  12. साल 2001 में उन्हें भारत रत्न दिया गया।

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लता मंगेशकर के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Unknown & Interesting facts about Lata Mangeshkar in Hindi)

  • लता मंगेशकर धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करती।
  • लता मंगेशकर के पिता एक रंगमंच के अभिनेता थे साथ ही वे शास्त्रीय गायन भी किया करते थे।
  • लता जब सिर्फ 5 साल की थी, तभी से उन्होंने अपने पिता द्वारा निर्देशित किए गए नाटकों में अभिनय करना शुरू कर दिया।
  • लता के पिता दीनानाथ मंगेशकर ने दो शादी की थी। लता की मां शेवंती मंगेशकर उनकी दूसरी पत्नी थी।
  • आपको यह जानकर हैरानी होगी कि लता का उपनाम मंगेशकर नहीं बल्कि हार्डिकर था। दरअसल, उनके मूल निवास यानी कि गोवा में छोटा सा कब्जा कस्बा मंगेशी था। उसी के आधार पर उन्होंने यह उपनाम रखा।
  • सिर्फ उपनाम ही नहीं लता का नाम भी बदला गया था। दरअसल, पहले उनका नाम हेमा था। लेकिन बाद में उनके परिजनों ने यह नाम बदलकर उनका नाम लता रख दिया। उनके पिता ने इस नाम के पीछे आईडिया अपने नाटक प्रबंधन में काम करने वाली महिला का नाम था। उनका नाम लतिका था। जिसे लता बनाया गया।
  • 1962 में उन्हें स्लो पॉइजन दिया गया जिसकी वजह से वे 3 महीने तक बिस्तर पर रहीं।
  • लता ने अपने गाने गाने के तरीके को बदलने के लिए सटीक उच्चारण सीखना बंद कर दिया
  • लता मंगेशकर मेकअप नहीं करती थी। उन्हें मेकअप करना पसंद नहीं था।
  • जब लता 13 साल की थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई।
  • लता मंगेशकर ने अपनी स्वयं की शैली बनाने के लिये उन्होंने उर्दू और हिंदी सीखी थी।

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Author:

भारती, मैं पत्रकारिता की छात्रा हूँ, मुझे लिखना पसंद है क्योंकि शब्दों के ज़रिए मैं खुदको बयां कर सकती हूं।