महात्मा गांधी की जीवनी | Mahatma Gandhi Biography in Hindi

Last updated on: October 2nd, 2020

Mahatma Gandhi
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महात्मा गांधी की जीवनी | Mahatma Gandhi Biography in Hindi

जीवन परिचय (संक्षिप्त वर्णन)
Mahatma Gandhi’s Full Name: मोहनदास करमचंद गांधी।
Mahatma Gandhi’s Father Name: करमचंद गांधी।
Mahatma Gandhi’s Mother Name: पुतलीबाई ।
Mahatma Gandhi’s Birth Date: 2 अक्टूबर 1869
Mahatma Gandhi’s Birth Place: पोरबंदर (गुजरात)
Mahatma Gandhi’s Education/Qualification: बैरिस्टर
Mahatma Gandhi’s Wife Name: कस्तूरबाई माखंजी कपाड़िया (कस्तूरबा गांधी )
Mahatma Gandhi’s son: हीरालाल, मणिलाल, देवदास, रामदास ।
Mahatma Gandhi’s death: 30 जनवरी 1948

महात्मा गांधी की जीवनी
महात्मा गांधी पूरे संसार में सभी के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है। भारत की स्वतंत्रता में महात्मा गांधी का महत्वपूर्ण योगदान है। इनके अहिंसात्मक आंदोलन के सिद्धांतों को पूरे संसार में एक आदर्श की तरह माना जाता है। महात्मा गांधी के अपने देश के प्रति उनके सिद्धांतों, सादगी, नैतिक विचार, शांति, सत्य, अहिंसा और उनकी जीवनशैली विश्व भर में विख्यात है।

सर्वप्रथम सुभाष चंद्र बोस द्वारा 1944 में रंगून रेडियो के माध्यम से महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से संबोधित किया गया था।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई० को पोरबंदर में भारत के गुजरात राज्य में हुआ था। 1915 ई० को महात्मा गांधी ने वकील के पद पर रहकर दक्षिण अफ्रीका में रहकर के भारत के जन समुदाय के लिए आवाज उठाई थी। 1921 ईस्वी में उन्होंने भारत में वापस आकर के भारत के पिछड़े हुए जाति, गरीब, मजदूरों और किसानों के ऊपर हो रहे जुल्म के लिए अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन किया। उन्होंने पूरे देश में भ्रमण करते हुए महिलाओं के लिए सामाजिक अधिकार, जाति और धार्मिक एकता तथा अस्पृश्यता की भावना को व्यक्त करते हुए उनके खिलाफ आवाज उठाई। 1930 ईस्वी में गांधी जी ने समुद्र से एक मुट्ठी नमक उठाकर नमक आंदोलन की शुरुआत की। इसके साथ ही उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन को महत्व देते हुए देश की आजादी के लिए अहिंसात्मक रूप से लड़ाई लड़ते रहें।

महात्मा गांधी का प्रारंभिक जीवन
मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म पश्चिम भारत के वर्तमान गुजरात राज्य में हुआ था। इनके पिता करमचंद गांधी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो कि ब्रिटिश शासक द्वारा शासित काठियावाड़ी राज्य के एक दीवान थे। उनकी माता पुतलीबाई एक जैन समुदाय से संबंधित रखती थी। जिंदगी शिक्षा-दीक्षा का असर गांधी जी पर काफी हद तक पहुंचा। 13 साल की आयु में उनकी शादी कस्तूरबा बाई से कर दी गई। जो कि एक बाल विवाह था उस समय या प्रथा काफी हद तक प्रचलित थी। गांधी जी की पत्नी कस्तूरबा बाई को लोग बा कहकर बुलाया करते थे। 15 वर्ष की आयु में गांधी जी की पहली संतान वी लेकिन वह अधिक समय तक जीवित न रह सकी। फिर बाद में उन्हें चार संताने हुई जो सभी लड़के थे, महात्मा गांधी के 4 पुत्रों के नाम इस प्रकार हैं – हीरालाल गांधी, रामदास गांधी, मणिलाल गांधी, देवदास गांधी हैं।

सामाजिक अव्यवस्था के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई अपनी पत्नी से अलग रह कर की थी। उन्होंने राजकोट से हाई स्कूल की परीक्षा पास की। हुए अपने जीवन में एक सामान्य छात्र की तरह ही थे। लेकिन उन्हें माता-पिता बैरिस्टर बनाना चाहते थे।

विदेश में शिक्षा और वकालत
अपने 19 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी ने अपने घर को छोड़कर वकालत की पढ़ाई करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन चले गए थे। यहीं पर है रह कर उन्होंने अपनी कानून की शिक्षा पूरी की और फिर बैरिस्टर बन गए। वे लंदन में रह करके अपने शाकाहारी भोजन करने के लिए काफी अधिक परेशान रहते थे। उनकी माता द्वारा सिखाएगी उनकी सीख को वह उल्लंघन नहीं करना चाहते थे। बाद में उन्होंने थियोसोफिकल सोसाइटी में सदस्यता ग्रहण करके अपने जैविक मूल्यों को सीखा। इस सदस्यता ग्रहण करने के बाद गांधी ने वेद पुराणों के ऊपर कोई विशेष रूचि नहीं दिखाया।

भारत में वापसी
भारत वापस आने के बाद उन्होंने मुंबई में रह करके वकालत की लेकिन वकालत में उनकी कोई विशेष रूचि नहीं थी। बाद में उन्हें एक मूर्ख अंग्रेज अधिकारी के कारण अपनी यह नौकरी छोड़ना पड़ी। इसके बाद उन्होंने शिक्षक पद की अर्जी दी जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने अस्वीकार कर दिया, उनके अर्जी को बर्खास्त करने के बाद उन्होंने गरीबों के लिए राजकोट पर वकालत करना आरंभ किया जिससे उन्हें एक अच्छा मुकाम हासिल हुआ।

महात्मा गांधी जी द्वारा की गई दक्षिण अफ्रीका की यात्रा
1893 ई० को गांधी जी को 1 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ वकालत करने के लिए भेजा गया था। दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के बाद उन्हें रंग रूप के नाम पर काफी अधिक भेदभाव का सामना करना पड़ा था। भारतीयों पर अंग्रेजो के द्वारा काफी ज्यादा अत्याचार किया जा रहा था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रह करके भारतीयों के लिए नैतिक विचार और उनके अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई।

एक बार गांधीजी ट्रेन में सफर कर रहे थे उस समय उनके पास फर्स्ट क्लास का टिकट होने के बावजूद भी उन्हें थर्ड क्लास की कंपार्टमेंट में जाने को मजबूर किया गया। इसी यात्रा में उन्हें काफी अधिक प्रताड़ित किया गया। इसी प्रकार उन्हें एक बार न्यायाधीश के द्वारा अपने सिर की पगड़ी को नीचे उतारने का आदेश दिया गया था जिनका उन्होंने साफ मना कर दिया था। फिर उनको अफ्रीका के कई होटलों से वर्जित कर दिया गया था। दक्षिण अफ्रीका जाने के बाद गांधी जी के जीवन में एक तरह से बड़ा परिवर्तन आ गया। असल में यहीं से उनके भीतर आंदोलन की भावना उत्पन्न हुई। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में रह करके भारतीयों के लिए, बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए अंग्रेजी सरकार का काफी विरोध किया।

प्रथम विश्वयुद्ध में महात्मा गांधी की भूमिका/प्रथम विश्व युद्ध में गांधी जी का सहयोग
सत्य एवं अहिंसा के पुजारी माने जाने वाले महात्मा गांधी ने प्रथम विश्वयुद्ध (सन् 1914 से 1919 के बीच) में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सेना भेजने का पूर्ण समर्थन किया। महात्मा गांधी ने यह उम्मीद बांध रखी थी कि विश्वयुद्ध में ब्रिटेन की ओर से भारतीय सेना के भाग लेने पर खुश होकर ब्रिटिश शासक भारत को आजाद कर देंगे परंतु ऐसा संभव नहीं हो सका।

अंग्रेज शासकों द्वारा भारतीय सेना को जब प्रथम विश्व युद्ध में लड़ने के लिए भेजा जा रहा था तब महात्मा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने अंग्रेज शासकों का अपना पूर्ण समर्थन दिया। साथ ही महात्मा गांधी ने देश के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया।

महात्मा गांधी ने कई अन्य नेताओं के साथ मिलकर कई अभियान चलाए, जो आगे चलकर देश की स्वतंत्र की लड़ाई के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुए। बहुत से युवाओं को मजबूरी वस सेना में भर्ती होना पड़ा और कुछ युवाओं ने सरकारी नौकरी की लालसा में सेना ज्वाइन की।

महात्मा गांधी व अन्य नेताओं ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार की अत्यधिक सहायता की। परन्तु युद्ध समाप्ति के पश्चात यह देखा गया कि ब्रिटिश शासकों ने देश को आज़ादी देने के मुद्दे पर बात करने से सीधे मना कर दिया। इस घटना से महात्मा गांधी को काफी आघात पहुंचा और उन्होंने ब्रिटिश सरकार पर भारतीय सेना तथा भारत के साथ छल करने का आरोप लगाया, इसने घटना से ही आगे स्वंतत्रता की लौ और तेज जाग्रत हुई।

असहयोग आंदोलन में गांधीजी की भूमिका
महात्मा गांधी ने असहयोग, अहिंसा एवं शांतिपूर्ण प्रतिकार को ही प्रबल अस्त्र के रूप में उपयोग किया। पंजाब में घटित हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने देश को हिला कर रख दिया, जनता के अंदर गुस्सा और उबाल बढ़ता जा रहा था। लोगों ने खादी वस्त्रों का उपयोग असहयोग आंदोलन के दौरान करना शुरू कर दिया था। इसके अतिरिक्त महात्मा गांधी ने जनता से ब्रिटेन के शैक्षिक संस्थानों का भी बहिष्कार करने का अनुरोध किया। इस बीच असहयोग आंदोलन अपने शीर्ष पर पहुंच गया इस आंदोलन ने ने जनता में अंग्रेजी हुकूमत को जड़ से उखाड़ फेकने का जूनून भर दिया और देश की स्वतंत्रता की लड़ाई को धार दी।

गांधी जी द्वारा देश को आज़ादी दिलाने के लिए चलाये गए विभिन्न मुख्य आन्दोलन
असहयोग आन्दोलन (1920)
अवज्ञा आन्दोलन(1930)
भारत छोड़ो आन्दोलन (1942)


गांधी जी द्वारा चलाये गए अन्य आंदोलन
गांधी जी का सर्वस्व जीवन ही आंदोलन की तरह रहा है परन्तु उन्होंने 5 मुख्य आंदोलन चलाये जिसमें 3 आंदोलन काफी व्यापक रहे और उनकी पहुंच सम्पूर्ण राज्यों तक रही

चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह (1918)
खिलाफत आन्दोलन (1919)
असहयोग आन्दोलन (1920)
अवज्ञा आन्दोलन / नमक सत्याग्रह आंदोलन/ दांडी यात्रा (1930)
भारत छोड़ो आन्दोलन (1942)

निष्कर्ष
महात्मा गांधी अपने धर्म, अहिंसा के लिए हमारे बीच जाने जाते हैं, आज हम सब को उनके बताये गए सिद्धांतों पर चलने की बहुत अधिक आवश्यकता है। उनकी विचारधारा को हर हिन्दुस्तानी को आत्मसात करना चाहिए।