प्रदूषण

प्रदूषण पर निबंध | Essay on Pollution

सामग्री Content
•प्रस्तावना Introduction
•प्रदूषण का अर्थ Meaning of pollution
•प्रदूषण के प्रकार, कारण व प्रभाव Types of pollution, what pollution causes and their effect.
•प्रदूषण को कम करने के उपाय Measures to control pollution
•उपसंहार Conclusion

प्रस्तावना Introduction.

एक स्वस्थ और बीमारी से मुक्त जीवन जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज जो है वह है एक शुद्ध प्राकृतिक वातावरण। आज प्रदूषण की समस्या से पूरा विश्व जूझ रहा है। प्रदूषण के कारण हमारे जल, थल और वायु की गुणवत्ता समय के साथ कम होती जा रही है। प्रदूषण के कारण हमारे चारों ओर कीटाणु बढ़ते जा रहे हैं जो तरह-तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं। न केवल मानव जीवन बल्कि हमारे जल जीव पर भी इसका कुप्रभाव पड़ रहा है। हमारे वायुमंडल में ज़हरीली गैस जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, फ्लोरोकार्बन तैर रही है। जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।

वृक्ष पर्यावरण को शुद्ध करने का कार्य करते हैं किंतु ऊंची इमारतें और रेल पटरियां बनाने के लिए घने जंगलों को छाँट दिया जाता है। जहां एक ओर हम आधारिक संरचना में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं वहीं हमे इसके कारण होने वाले प्राकृतिक नुकसान को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रदूषण का अर्थ Meaning of pollution/Pollution kya hai

Pollution Hindi meaning: प्रदूषण

प्रदूषण का अर्थ है प्रकृति के गुणों में असंतुलन पैदा होना। सरल भाषा में कहें तो हमारे वातावरण में चारों ओर फैली हुई गंदगी ही प्रदूषण हैं। पर्यावरण में दूषक पदार्थों के मिलने के कारण उसमें प्रदूषण उत्पन्न होता है।

मनुष्य की लापरवाही के कारण प्रकृति में जब अस्वीकृत वस्तुए प्रवेश करती हैं जैसे कारखानों द्वारा उत्पन्न हुआ धुआं, समुद्री नदियां आदि में गंदगी फैलाना, शादी या त्योहारों पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर या बाजा बजाना या प्लास्टिक, बैग, बैटरी या बोतल का इस्तेमाल करना जिनका न के बराबर पुनर्चक्रण संभवना हो, जब प्रकृति में मिलती है तो जल, थल और वायु पर बुरा प्रभाव डालती है। यह सब चीजें मिलकर हमारे वातावरण को प्रदूषित करती हैं। प्रदूषण के का कारण हमारे जानवर जल, जीव और मनुष्यों के स्वास्थ पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में पांचवें नंबर पर आता है। जिसमें दिल्ली, पटना, आगरा, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी आदि सबसे प्रदूषित शहरों में आते है। प्रदूषण बहुत तरह की बीमारियों को जन्म देता है। यह सुनने में ही कितना भयावह है कि हर वर्ष भारत में प्रदूषण के कारण लगभग 24 लाख मृत्यु होती हैं। प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं जैसे कि जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि।

प्रदूषण के प्रकार, कारण व प्रभाव Types of pollution, what pollution causes and their effect.

Pollution Harmful Effects/Pollution and its Effects

जल प्रदूषण

समुद्रों, तालाबों, नदियों में घातक तत्वों के मिलने पर उसको अशुद्ध करता है तो उसे हम जल प्रदूषण कहते हैं। तालाब या नदियों में जानवरों को नहलाना, कपड़े धोना, सीवर को नालियों द्वारा नदियों से जोड़ना या फिर धार्मिक परंपराएं जैसे फूल अर्पित करना, मूर्ति विसर्जन आदि जल प्रदूषण के कारण हैं। बड़े-बड़े कारखानों के अपशिष्ट पदार्थ नदियों में जाकर मिल जाते हैं।

प्रभाव- जल प्रदूषण जल जीवों को क्षतिग्रस्त करता है। जल प्रदूषण के कारण एनीमिया, चर्म रोग, पेट से संबंधित रोग, ज्वाइंडिस, पाचन की समस्या व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती हैं।

वायु प्रदूषण

वायु मनुष्य के जीवन का आधार है। बिना वायु के वह जीवित नहीं रह सकता। प्रदूषण के कारण हवा की गुणवत्ता समय के साथ खराब होती जा रही है। जंगलों को काटकर ऊंची इमारतें बनाना या रेल पटरी बिछाना, परिवहन मे वृद्धि, कारखानों आदि से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण के कारण है। इस कारण वायु में जहरीली गैस बढ़ती जा रही है। जन जीव इसी अशुद्ध वायु में सांस लेते हैं।

प्रभाव- वायु प्रदूषण के कारण खांसी की बीमारी, सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी, आंख और नाक में जलन होना, फेफड़ों के रोग जैसी घातक बीमारियां होती हैं। वायु प्रदूषण के कारण हमारी ओजोन परत जो कि सूरज की हानिकारक किरणों को धरती पर आने से रोकती है, समय के साथ पतली होती जा रही है। जो की सभी जीवो और वृक्षों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

ध्वनि प्रदूषण

जब किसी ध्वनि की तीव्रता बहुत अत्यधिक हो या असहनीय हो तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार 40 से 50 डेसिबल की ध्वनि मनुष्य सहन कर सकता है। जब ध्वनि की तीव्रता इससे अधिक हो जाती है तो वह हमारे लिए हानिकारक होती है।

कारखानों, मशीनों से निकलने वाली तेज आवाज़, वाहनों में लगे तेज हॉर्न, शादी या त्योहारों पर बैंड बाजे का शोर, रैली या चुनाव प्रचार के दौरान जगह जगह लगे लाउडस्पीकर ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं।

प्रभाव- ध्वनि प्रदूषण के कारण व्यक्ति के सुनने की क्षमता घटती जाती है। सिर दर्द, हृदय रोग, दमा व अल्सर जैसी बीमारियां हो जाती है। अत्यधिक शोर से हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता

प्रदूषण को कम करने के उपाय Measures to control pollution.

2 अक्टूबर 2014 में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा स्वच्छ भारत अभियान की पहल की गई थी। यह अभियान महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस अभियान के साथ बहुत से प्रसिद्ध लोगों को जोड़ा गया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य गांव-गांव में शौचालय बनाकर खुले में शौच करने की समस्या को समाप्त करना है।

इसी प्रकार समय-समय पर भारत सरकार ने प्रदूषण की समस्या से मुक्ति पाने के लिए बहुत सारे कानून व नियम बनाए हैं जैसे कि

1974 में जल अधिनियम (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) एक्ट, 1948 में फैक्ट्री एक्ट, 1981 में वायु अधिनियम (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) एक्ट व बहुत से अन्य कानून लागू किए गए हैं।

प्रदूषण की समस्या को खत्म करने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयास तो कर रही है परंतु इसके साथ ही हर व्यक्ति को इसमें बराबर का सहभागी होना पड़ेगा। जब तक हर एक नागरिक अपने आसपास के इलाके को साफ रखना अपना कर्तव्य नहीं समझेगा तब तक इस समस्या से निजात पाना बहुत ही कठिन है। प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए हर व्यक्ति को स्वयं अपने आप से इसकी शुरुआत करनी होगी।

हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि हम जिस जगह रहते हैं वह गली या मोहल्ला स्वच्छ हो। समय-समय पर नालियों और कूड़ेदानों की सफाई की जाए।

प्लास्टिक की थैली, बोतल आदि के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगना चाहिए। इनके स्थान पर कागज के थैले या झोले आदि का प्रयोग करना चाहिए जिनका पुनर्चक्रण संभव हो।

सार्वजनिक स्थानों पर लाइट लाउडस्पीकर बैंड बाजे आदि लगाने के लिए कड़े कानून बनने चाहिए।

लोगों को वृक्षारोपण व घरों में पौधे लगाने के लिए जागरूक करना चाहिए।

तीज त्यौहार आदि पर कम से कम पटाखों का उपयोग करना चाहिए।

वाहनों से निकलने वाले धुएं व तेज़ हॉर्न की निरंतर चेकिंग होनी चाहिए।

कारखानों व उद्योगों की स्थापना शहरों से दूर करनी चाहिए।

इन्हीं छोटे-छोटे। प्रयास से हम अपने आसपास की जगह को स्वच्छ रख सकते हैं। और प्रदूषण की समस्या को समय के साथ नियंत्रण में कर सकते हैं।

उपसंहार Conclusion.

प्रकृति हमारे लिए एक वरदान है। प्रकृति से ही मनुष्य है। आज हमारी लापरवाही के कारण हमे विरासत में मिला शुद्ध प्राकृतिक वातावरण हम धीरे-धीरे नष्ट कर रही है।

जिसका भुगतान ना केवल हमें बल्कि हमारे आने वाली पीढ़ियों को भी करना पड़ सकता है। या हमारा कर्तव्य होना चाहिए कि हम अपने में प्राकृतिक वातावरण की स्वच्छता के लिए जागरूक हो। हम कोई भी ऐसा काम ना करें जिससे किसी भी प्रकार का प्रदूषण उत्पन्न हो। प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए नियम व कानून का हमें पालन करना चाहिए। हमें लोगों विशेष रूप से बच्चों को प्रदूषण की समस्या के बारे में समझाना चाहिए वह मैंने वृक्ष और पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जब सब हम जब हम सब मिलकर एक साथ स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाएंगे तो एक दिन हमारा भारत स्वच्छ और सुंदर होगा। निसंदेह हम सब मिलकर ‘एक नया सवेरा लाएंगे, भारत को स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे’

Author

आयशा जाफ़री, प्रयागराज