HINDI KAVITA: दहेज प्रथा

Last updated on: November 7th, 2020

दहेज प्रथा

दहेज प्रथा का करो विनाश
इससे होता कितना नाश ।

नारी सब कुछ सहती हैं
आसूं पी कर रहती हैं।

दहेज के खातिर ब्याह रचाते
नहीं मिले तो खूब सताते।

जिंदा उस नारी को जलाते
पर उसको खुदखुशी बताते।

अपनी बहन, बेटी न आती ध्यान
जब करते उस नारी का अपमान ।

फिर भी सब कुछ सहती आती
घुट घुट कर वो मरती जाती ।

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Author:

रश्मि सिंह, दिल्ली