Essay on Wildlife In India

Essay on Wildlife In India
Essay on Wildlife In India | भारत में वन्यजीव पर निबंध

Essay on Wildlife In India | भारत में वन्यजीव पर निबंध


भूमिका

मानव के धरती पर उत्पत्ति से पहले ही पेड़-पौधे, जंगली जीव-जंतुओं का अस्तित्व रहा है। कई सालों से इन्होंने ही धरती पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। लेकिन जैसे ही मानव का प्रादुर्भाव हुआ वैसे-वैसे उसने अपने स्वार्थपरक आवश्यकताओं के लिए धीरे-धीरे जंगलों को साफ करना शुरू कर दिया। यह जंगल ही वन्यजीवों के निवास स्थान है। यदि इनकी सुरक्षा नहीं कि जाती है तो यह धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं।

लेकिन फिर भी इन जंगलों की कटाई का सिलसिला वैश्विक स्तर पर ही नहीं हुआ बल्कि भारत में भी बड़ी मात्रा में जंगलों को खत्म किया गया जिससे लोग उन जगहों पर अपने घर बनाकर निवास कर सकें। लेकिन इससे वन्यजीवों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। अब तक ना जाने कितने ही वन्यजीवों का खात्मा हो चुका है। वहीं कई वन्यजीव लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इन वन्यजीवों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए वन्य जीवों का संरक्षण ज़रूरी है।

वन्य जीव किसे कहते हैं?

जिन जीवों को मानव द्वारा पालतू नहीं बनाया गया है, वे सभी वन्यजीवों की श्रेणी में आते हैं। आसान शब्दों में कहें तो मनुष्य द्वारा जिन जीवों, पौधों का पालन पोषण नहीं किया जाता वे सभी वन्य जीव कहलाते हैं। वन्यजीवों में पेड़ पौधे, पशु-पक्षी आदि शामिल होते हैं। जीवों की यह श्रेणी मानव आवासों से बाहर जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों व घास के मैदानों में निवास करती है। लेकिन आज इन्हीं वन्य जीवों के निवास स्थान खतरे में पड़ चुके हैं और इसे खतरे में डालने का काम मनुष्य ने किया है। ऐसे में इन वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उनके आवासों की सुरक्षा करना जरूरी है।

प्रमुख वन्य जीवों में बाघ, शेर, हाथी, सियार, लकड़बग्घा, जिराफ़, हिरण, बारहसिंगा, चीतल जैसे वन्य जीव सम्मिलित हैं।

वन्य जीवों का महत्व

  1. हमारी पृथ्वी विभिन्न जीव जंतुओं, पेड़ पौधों और इसके प्राकृतिक विविधता की वजह से खूबसूरत दिखती है। अगर पृथ्वी से वन्यजीव गायब हो जाएंगे तो यह इतनी सुंदर नहीं रहेगी जितनी आज है।
  2. वन्यजीवों का वैज्ञानिक महत्व भी है। क्योंकि कई वैज्ञानिकों ने वन्यजीवों पर कई अध्ययन किए और अपनी खोजो में उन्होंने मनुष्य के लिए लाभकारी औषधियों का भी खोज किया है।
  3. वन्यजीवों से हमें कई महत्वपूर्ण चीज़ें जैसे की लकड़ी, मांस, खाद्य पदार्थ आदि प्राप्त होते हैं। यह सभी पदार्थ किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और वहां रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
  4. यदि वन्य जीव लुप्त हो जाएंगे तो इससे खाद्य श्रृंखला बिगड़ जाएगी।
  5. वन्य जीव पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखते हैं। इन्हीं की वजह से जंगल में मौजूद जीवों की संख्या सीमित रहती है। लेकिन यदि इनमें से किसी भी जीव को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाता है तो जंगल में अन्य जीवों की संख्या में इजाफा होता है जिससे पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा हो जाता है।

वन्य जीवों पर खतरा क्यों हैं?

जिस गति से जनसंख्या में बढ़ोतरी हो रही है, उस गति से लोगों की जरूरतें भी बढ़ती जा रहीं हैं। लोगों की आधी से ज्यादा जरूरतें जंगलों से ही पूरी होती है। जैसे कोयला हासिल करने के लिए पेड़ों को काटना, आवासीय और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए भूमि की आवश्यकता आदि। इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पेड़-पौधों की कटाई की जा रही है।

मनुष्य के बढ़ते स्वार्थ की वजह से जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं जिससे जैव विविधता पर प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही मनुष्य जंगली जानवरों के अंगों को बेचकर उनका व्यापार करते हैं वे पशु पक्षियों की हत्या करते हैं जिस वजह से इन सभी वन्यजीवों को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

कई वन्य जीव जैसे सांप और गैंडे की खाल को निकाल कर बेचा जा रहा है। क्योंकि बाजार में उनके चमड़े से बनने वाले सामानों की कीमत और मांग काफी ज्यादा है। इसी चमड़े को शिकारी ऊंची कीमतों में बेचकर काफी पैसा कमाते हैं और इसी लालच में आकर अन्य लोग भी इन जानवरों की अंधाधुंध हत्या करने में लगे हुए हैं।

लेकिन इस धरती पर प्रत्येक जीव की मौजूदगी होने के पीछे कई कारण हैं। जैसे कि सांप किसानों के दोस्त भी कहे जाते हैं क्योंकि यह खेत में मौजूद उन कीड़े मकोड़ों और चूहों को खा जाते हैं जो कि फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस तरह प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। अगर इस प्राकृतिक श्रृंखला में से एक भी जीव लुप्त हो जाता है, तो इस श्रृंखला में असंतुलन पैदा हो जाएगा। अगर वन्यजीवों की हत्या का सिलसिला इसी तरह चलता रहा तो इससे हमारी खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक तंत्र में अव्यवस्था फैल जाएगी।

वन्य जीवों का संरक्षण करने के तरीके

वन्य जीवों का संरक्षण करने के लिए सरकार और लोगों द्वारा कुछ कदम उठाने जरूरी हैं। नीचे वन्यजीवों के संरक्षण करने के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

  1. लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके जानवर व पक्षियों को मारने और उन्हें फालतू बनाने को लेकर कड़े कानून बनाए जाने चाहिए।
  2. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य बनाने चाहिए।
  3. वृक्षों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगानी चाहिए क्योंकि यही वृक्ष जंगली जीव जंतुओं के प्राकृतिक आवास हैं और इनकी कटाई से उनके आवास नष्ट हो जाते हैं।
  4. जीव जंतुओं के लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन पर जोर देना।

वन्य जीव संरक्षण के लिए उठाए गए कदम

वन्य जीवों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। अगर समय रहते इन्हें संरक्षित नहीं किया गया तो यह बिल्कुल लुप्त हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं है कि अब तक इन्हें संरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर में कई वन्य जीव अभयारण्य, पार्क, राष्ट्रीय उद्यान आदि बनाए गए हैं जहां इन वन्यजीवों को रखा जा रहा है जिससे इनकी तादाद को कम होने से बचाया जा सकें। इसके अलावा भारत में वनों और वन्यजीवों के लिए कई तरह के अधिनियम चलाए गए हैं। इन अधिनियमों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम, राष्ट्रीय वन जीव कार्य योजना जैसे अधिनियम प्रमुख हैं।

सभी प्रयासों के फलस्वरूप वन्यजीवों की कई प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा चुका है।

  1. वन्य जीव संरक्षण के लिए सरकार द्वारा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 बनाया गया है। इसके अंतर्गत वन्यजीवों के शिकार के खिलाफ उन्हें कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। अगर इस अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन करता है तो उसके लिए दंड का प्रावधान भी है।
  2. इस अधिनियम में 6 अनुसूचियों को शामिल किया गया है। प्रत्येक अनुसूची वन्यजीव को अलग-अलग तरीके से सुरक्षा प्रदान करती है।
  3. इस अधिनियम के तहत अवैध शिकार, जानवरों के हाड़, मांस और खाल के व्यापार को प्रतिबंधित किया गया।
  4. साल 2003 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 को संशोधित कर इसका नाम भारतीय वन्यजीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम (2002) कर दिया गया। इस संशोधन के साथ इस अधिनियम में उल्लेखित दंड और जुर्माने को और भी कठोर किया गया।
  5. इसकी अनुसूची के अंतर्गत जानवरों का अवैध शिकार करने पर 3 साल के कारावास का प्रावधान है। हालांकि इस कारावास को 7 साल की अवधि तक बढ़ाया भी जा सकता है। इस पर जुर्माना 10,000 है। जुर्माने की राशि ₹25000 या इससे अधिक हो सकती है।
  6. देश के 33 फ़ीसदी हिस्से में वृक्ष लगाकर वनों का विस्तार करने के पीछे कार्य किया जा रहा है।
  7. विभिन्न वनों में जैव विविधता को बनाए रखने के पीछे कार्य किया जा रहा है।
  8. समय-समय पर पेड़ों की कटाई, जानवरों के शिकार को लेकर जन आंदोलन चलाना। इस तरह के जन आंदोलन में पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी सम्मिलित होती हैं।

Loudspeakerचिड़ियाघर और वन्यजीव अभयारण्य के बीच अंतर

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Author:

Bharti
Bharti

भारती, मैं पत्रकारिता की छात्रा हूँ, मुझे लिखना पसंद है क्योंकि शब्दों के ज़रिए मैं खुदको बयां कर सकती हूं।