HINDI KAVITA: अंत

अंत

जिस्म की गिरफ़्त से तो आजाद हो गया वो …
रूह पर मगर एक दाग रह जायेगा…१

अब तो इस कंकाल से जुदाई ही बेहतर है..
कुछ दिन और रुका तो ये इंसान ढह जायेगा…२

आज आंखों का सारा पानी सुखा दो तुम…
कल एक आंसू भी गिरा तो ख्वाब़ बह जायेगा…३

औ बेशुमार दर्द दो उसे उसके गुनाहों का…
बड़ा बेशर्म इंसान है वो सब सह जायेगा…४

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About Author:

मेरा नाम अनुराग यादव है। मैं उन्नाव, उत्तर प्रदेश से हूॅं। हिंदी भाषा में अत्यंन्त रुचि है। हिंदी के व्याकरण एवं कविता की बारीकियों से अनभिज्ञ हूॅं। फिर भी कविता लिखने का प्रयास करता हूं। त्रुटियों के लिये क्षमाप्रार्थी हूॅं एवं आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन का आकांक्षी हूॅं। 🙏🏻😊