HINDI KAVITA: हिन्दी पर अभिमान है

Last updated on: September 24th, 2020

हिन्दी पर अभिमान है

सजकर भारत माता के मस्तक पर
करती श्रृंगार इक बिंदी
है राष्ट्र धरोहर भारतीय संस्कृति की
मातृ भाषा हमारी हिंदी
अनमोल शब्दों की जो खान है
बनाती भारत को महान है
है गर्व मुझे मातृ भाषा पर
हिंदी पर मुझे अभिमान है

आसानी से इसको हमसब धारा प्रवाह बोल पाते हैं
मिश्री सी मिठास बनाकर वाणी में घोल पाते हैं
मधुर सरस मृदुभासी बनकर अपना व्यक्तित्व सजाते हैं
कविता कहानी गज़ल गीत और काव्य पाठ करपाते हैं हिंदी साहित्य में दिनकर निराला जगत में जाने जाते हैं
अनमोल साहित्यकार कितने हिंदी को पहचान दिलाते हैं
सुन्दर सुसज्जित सृजनामकता हिंदी का स्वरूप दिखाते हैं
रस बनकर बहती होठों पर मीठी सी मधुर इक तान है
है गर्व मुझे मातृ भाषा पर हिंदी पर मुझे अभिमान है,

अमृत वाणी हिंदी का कितनों ने व्याख्यान किये
ग्रंथो में जिसने हम सबको तुलसी कबीर संत महान दिए
अपनाएं सब हिंदी जग में जगायेंगे प्रेम का भाव
अनमोल शब्दों के मोतियों का सागर ऐसा हिंदी का प्रभाव
बनकर रहुँ मैं हिंदीभाषी है मन की यही अभिलाषा
मातृ भूमि के चंदन सी उड़ती धूल लगे मुझको हिंदी भाषा


हो अधीरता हिंदी के प्रति जैसे हो कोई मृग प्यासा
बसे सभी जनमानस की वाणी है इतनी सी आशा
गर्व करें देश वासी जिसपर मुख पर हो एक समान
जो भारत के राष्ट्र का गौरव है
और आन बान और शान है
है गर्व मुझे जिस भाषा पर
हिंदी पर अभिमान है
हिंदी से हिंदुस्तान है
कहलाता भारत महान है!

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सोनल उमाकांत बादल , कुछ इस तरह अभिसंचित करो अपने व्यक्तित्व की अदा, सुनकर तुम्हारी कविताएं कोई भी हो जाये तुमपर फ़िदा 🙏🏻💐😊