लेख: बेटियां सुरक्षित कैसे हों?

बेटियां सुरक्षित कैसे हों?

बेटियों के साथ हो रही दुष्कर्म और हत्या की खबरें को सुनते सुनते सुनते रामधन काका बहुत परेशान थे और सोच रहे थे क्या जमाना आ गया है अब तो यह समाज का और लोगों का भगवान ही मालिक है रामधन काका सोच रहे थे किससे बात करें और क्या बात करें?

लेकिन मन नहीं माना तो रामदास से अपने मन की बात कही ही डाली का हो भैया राम दास !देख रहे हो क्या जमाना आ गया है ? रामदास बोले-क्या हो गया भैया?

अब का कही हमैं तौ कुछ समझै नाहीं आवत है।रामधन काका परेशान से होकर बोले।आखिर ई पापियन कै पाप कहाँ समाई।

रामदास बोले-बहुत बुरा समय आ गया है रामधन भैया।समाज में बढ़ रहे पाप की बात तो सही है ।
रामधन काका रामदास से पूँछ बैठे-आखिर येकर इलाज का है। रामदास के मन में भी आक्रोश था।जिसे रामधन काका ने हवा दे दी।

कुछ नहीं भैया बस इसका एक ही इलाज है कि इन पापियों को सार्वजनिक जगहों पर वैसे ही तड़पा तड़पाकर दर्द दिया जाय जैसा कि उसने किसी बहन बेटी के साथ किया हो। रामधन काका की जैसे उत्सुकता बढ़ गई।वे बीच में ही बोल पड़े।मगर ई होई कैसे?

रामदास ने रामधन काका को समझाया-देखो भैया।फाँसी से आसान सजा कुछ नहीं है।आधे घंटे में कहानी खत्म।पापियों को थोड़े से ही दर्द में मुक्ति मिल जाती है।

रामदास का चेहरा गुस्से से लाल होने लगा।अरे ऐसे पापियों को शहर के सबसे बड़े चौराहे पर बांध कर तड़पाया जाय।वो मौत माँगते रहें वो भी उन्हें नसीब न हो।जब दर्द से चीखें चिल्लायेंगे तब उस बहन बेटी की पीड़ा का अहसास होगा, जिसकी जिंदगी उन्होंने बेरहमी से छीन ली है।इससे लोगों के बीच दहशत बढ़ेगी, और कोई भी ऐसी जलील नापाक हरकत करने से पहले सौ बार सोचेगा।

बात तौ तोहार ठीक है रामदास लेकिन….।रामधन काका कुछ कहते कहते रूक गये। मैं सही कह रहा हूँ रामधन भैया।रामदास ने रामधन को समझाते हुए कहा।

एक बार सरकार इस तरह.की सजा देना शुरू कर दे।हमारी बहन बेटियां सुरक्षित हो जायेंगी।अन्यथा आये दिन ऐसी ही खबरें सुन सुनकर हम यही प्रार्थना करने लगेंगे कि हे भगवान!बे औलाद रखना।मगर बेटी मत देना।

रामधन काका ने सिर पकड़ लिया। वे कुछ बोल न सके। रामदास रामधन काका को राम जोहार करते हुए अपने घर की ओर बढ़ गये।

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सुधीर श्रीवास्तव
शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल
बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002