शिलाजीत के फायदे

Last updated on: April 3rd, 2021

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शिलाजीत के फायदे | Shilajit Benefits | Side-Effects in Hindi

शिलाजीत के फायदे | Benefits of Shilajit in Hindi

प्रकृति में बहुत सारे खनिज पदार्थ पाए जाते हैं। कभी सोना, कभी चांदी, कभी हीरा इत्यादि और इनमें से शिलाजीत की अपनी एक अलग पहचान और विशेष स्थान है। यह ज्यादातर हिमालय और भारतीय उपमहाद्वीप के हिंदूकुश पर्वत पर पाए जाते हैं।

यह एक बहुत ही दुर्बल पदार्थ है जो हजारों सालों से पौधों और जानवरों के विघटन के फलस्वरूप प्राप्त होता है। यह देखने में काले रंग का गाढा और रिसेलदार खनिज पदार्थ होता है। आयुर्वेदिक मत में हजारों वर्षों से शिलाजीत को पारंपरिक औषधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है । हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में भी इस दिव्य औषधि का बहुत सा उल्लेख मौजूद है। इस पारंपरिक औषधि को कुछ ग्रंथों में ‘सोने जैसे धातु का पत्थर’ या फिर ‘चिपचिपा पदार्थ’ के रूप में वर्णित किया गया है।

आयुर्वेद में शिलाजीत को एक रसायन यानी शक्ति वर्धक औषधि के रूप में माना जाता है क्योंकि इसका सेवन करने से व्यक्ति की पूरी सेहत में सुधार होता है। शिलाजीत का अर्थ है जो पहाड़ों को भी जीत ले तथा शरीर से कमजोरी को दूर कर दे। इसी मतलब के आधार पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सेहत के लिए कितने गुणों वाली हो सकती है। कुछ आयुर्वेदिक विशेषज्ञ यह मानते हैं कि शिलाजीत में से गोमूत्र के समान गंध आती है। लेकिन शुद्ध शिलाजीत का सेवन करना पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए काफी उपयोगी माना गया है।

शिलाजीत का साइंटिफिक नाम असफालटम पंजा-बिआनम है। सामान्य भाषा में इसे एस्फाल्ट मिनरल कहा जाता है। शिलाजीत आदि नाम दिए गए हैं ।यदि इसके भूगौलिक विवरण की बात करें तो यह हिमालय के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश ,उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर जैसे ठंडे इलाकों में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है ।

इसके अलावा शिलाजीत नेपाल, पाकिस्तान ,तिब्बत अफगानिस्तान में भी पाया जाता है। इस की तासीर गर्म होती है तथा यह पचाने में थोड़ी भारी भी होती है। इसलिए गर्मियों के मौसम में इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। कुछ विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह खांसी, जुकाम आदि से बचाने में भी कारगर है।

शिलाजीत को तरल पदार्थ तथा पाउडर बनाकर दोनों ही रूपों में इस्तेमाल किया जा सकता है ।लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि इस को जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन न करें ।इसके पाउडर को दूध के साथ ही ले ने की सलाह दी जाती है। इसे घी के साथ भी लिया जा सकता है। विशेषज्ञों द्वारा इसकी रोजाना 300 से 500 मिलीग्राम तक की खुराक ही लेने की सलाह है ।

लेकिन व्यक्ति के शरीर के हिसाब से इसकी मात्रा को कम या ज्यादा किया जा सकता है ।किसी भी मात्रा में शिलाजीत लेने से पहले डॉक्टरी परामर्श लेना जरूरी है इस बात का ध्यान रखें कि इसमें कोई स्टेरॉइड्स नहीं है यह पूरी तरह से कुदरती खनिज है। इसको सुबह व्यायाम करने से पहले या रात को सोते समय लेने की सलाह दी गई है।



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आइये बात करते हैं इसके कुछ मुख्य फायदों के बारे में:-

शिलाजीत के फायदे (Shilajit benefits in Hindi)

दिमाग करे तेज शिलाजीत

शिलाजीत में फुलविक एसिड पाया जाता है। यह एसिड एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। यह एसिड मस्तिष्क को स्वस्थ व निरोगी बनाए रखने में बहुत मददगार होता है। बहुत से अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि शिलाजीत में पाया जाने वाला फुलविक एसिड, टाऊ प्रोटीन के असामान्य निर्माण में रोक डालने में मदद करता है। जिससे सूजन कम होती है और अल्जाइमर जैसी बीमारी के लक्षणों में सुधार आता है। इस पर अभी और शोध की आवश्यकता भी है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे नारटोरोपिक की सूची में वर्गीकृत किया है ।क्योंकि यह दिमाग को नई चीजें सीखने में मदद करता है तेज दिमाग हर कोई चाहता है। इसलिए शिलाजीत इसमें बहुत सहायक साबित हुआ है। यह व्यक्ति की स्मरण शक्ति बढ़ाकर दिमाग को पौष्टिक तत्व पहुंचाता है ।जो तनाव को दूर करने और एकाग्रता लगाने में काफी मदद करते हैं।

उच्च रक्तचाप करे नियंत्रित

आज के समय में उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से बहुत सी जनसंख्या ग्रसित है। इसके पीछे का एकमात्र कारण आजकल की जीवन शैली है।रक्तचाप को न नियंत्रित कर पाने से ही दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए शिलाजीत का सेवन करने से हमारा रक्तचाप सामान्य स्थिति में बना रहता है तथा बहुत से हृदय रोगों पर भी काबू पाया जा सकता है। शिलाजीत को यदि एक आहार पूरक के रूप में प्रयोग किया जाए तो यह दिल से जुड़ी बहुत सी परेशानियों का हल कर सकता है तथा दिल के स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकता है। परंतु फिर भी यह सलाह दी जाती है कि यदि कोई व्यक्ति उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए शिलाजीत का सेवन करना चाहता है तो एक बार उसे डॉक्टरी परामर्श जरूर ले लेना चाहिए।

आयरन की कमी को करे दूर

अक्सर महिलाओं में आयरन की कमी के लक्षण अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इस बीमारी को अंग्रेजी भाषा में एनीमिया का नाम दिया गया है जो शरीर में खून की कमी की वजह से पाई जाती है। इस बीमारी के लक्षण में शरीर में जरूरत से ज्यादा थकान और सांस लेने की समस्या जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं। कई बार चक्कर आने के लक्षण भी होते हैं। इस बीमारी में शिलाजीत काफी मदद पहुंचाता है क्योंकि इसमें ह्यूमिक एसिड और आयरन मौजूद होता है जो शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया को तेज कर शरीर में स्फूर्ति प्रदान करता है। इस प्रकार शिलाजीत एनीमिया को कम करने में मददगार साबित होता है।



अजवाइन के फायदे

मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद

बहुत से अध्ययनों में पता चला है कि मधुमेह यानी डायबिटीज से ग्रसित लोगों में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित करना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में शिलाजीत काफी मदद करती है तथा उनके शरीर में ग्लूकोज के स्तर को कंट्रोल करती है। इसलिए शिलाजीत को मधुमेह नाशक औषधि के रूप में भी जाना जाता है। डायबीटिक न्यूरोपैथी के लिए भी यह काफी फायदेमंद है। यह हृदय को ताकत देती है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रबल कर स्वास्थ्य में सुधार लाती है। यह शरीर की थकान को कम कर शरीर में नई ऊर्जा का संचार करती है। इसमें शिलाजीत d400 या ग्लूकोकेयर नाम के मुख्य रसायनिक तत्व मौजूद हैं।

यौन समस्याएं भगाएं दूर

आजकल बढ़ते तनाव और बदलती दिनचर्या की वजह से लोगों में यौन संबंधित रोग ज्यादा उत्पन्न होने लगे हैं। ऐसी स्थिति में शिलाजीत बहुत ही कारगर यौन टॉनिक के रूप में काम करती है। ‘कामसूत्र’ जो विश्व का सबसे पुराने मानव यौन व्यवहार साहित्य है इसमें भी इसका वर्णन मिलता है। यह महिलाओं एवं पुरुषों दोनों की यौन इच्छा और प्रबलता को बढ़ाने में मदद करता है। यह यौन संबंधित रोगों का निवारण करता है। यह बांझपन की समस्या के निवारण में भी कारगर सिद्ध हुआ है। महिलाओं के मासिक धर्म को नियंत्रित करने में भी यह काम करता है। यह अंडाशय को फायदा पहुंचा स्वस्थ करता है तथा पुरुषों में शुक्राणु की मात्रा को बढ़ा शुक्राणुओं को स्वस्थ बनाता है। यदि सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो यह गर्भावस्था में भी काफी फायदा पहुंचाता है।

मूत्राशय को दे लाभ

यह आयुर्वेदिक औषधि गुर्दों तथा मूत्राशय को भी काफी लाभ पहुंचाती है। यह मूत्र में होने वाली जलन तथा पथरी के दर्द तथा पथरी दोनों से निवारण दिलवाने में फायदेमंद है। यह शरीर में गुर्दे के काम करने की क्षमता को दुरुस्त करता है तथा मूत्र संबंधित विकारों को दूर रखने में मदद करता है।



जीरा के फायदे

डिमेंशिया में असरदार

शिलाजीत डिमेंशिया यानी बार-बार भूलने की बीमारी में भी काफी मदद पहुंचाती है। इस बीमारी में व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है। शिलाजीत में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग में से विषैले तत्व बाहर निकाल दिमाग के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं तथा व्यक्ति की याददाश्त को मज़बूत करते हैं।

हड्डियों के लिये फायदेमंद

जैसा कि हमने जाना कि शिलाजीत एक रासायनिक खनिज है। यह शरीर की हड्डियों के लिए भी काफी फायदेमंद है। बढ़ती उम्र के कारण या फिर शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियों की समस्या होने लगती है। इन समस्याओं में सबसे आम आर्थराइटिस की समस्या है। आर्थराइटिस की समस्या में शिलाजीत और अश्वगंधा का सेवन बहुत ही बेहतर नतीजे दिखाता है। बहुत सी आयुर्वेदिक दवाओं में इन दोनों के मिश्रण को अर्थराइटिस के इलाज में प्रयोग किया जाता है।

शिलाजीत के नुकसान (Shilajit side-effects in Hindi)

वैसे तो शिलाजीत के बहुत अधिक नुकसान दर्ज नहीं किए गए हैं परंतु अति हर चीज की बुरी होती है। इसलिए इसका जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर शरीर में गर्मी बढ़ जाती है और एलर्जी होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसमें बहुत उच्च मात्रा में लौह तत्व पाए जाते हैं। इसलिए अगर शिलाजीत का ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो शरीर में लौह संबंधी विकार पैदा होने लगते हैं गर्भावस्था में इसके फायदे जरूर है लेकिन इस अवस्था में बिना डॉक्टरी परामर्श के इस का सेवन नहीं करना चाहिए।

आपने शिलाजीत के फायदे और नुकसान पढ़े, ऊपर सुझाये गए सारे ही नुस्खे और उपचार आपकी जानकरी के लिए है किसी भी नुस्के को आजमाने से पहले अपने डॉक्टर की परामर्श जरूर लें।



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Author:

Geeta Verma Malhotra
M.Pharmacy (Ayurved)
Lovely Professional University, Punjab