सौर तूफान क्या होता है?

Solar Storm in Hindi
सौर तूफान क्या होता है? | What is Solar Storm in Hindi?

सौर तूफान क्या होता है? | What is Solar Storm in Hindi?

तूफान शब्द के बारे में सुनकर हमारे दिमाग में सबसे पहले बिजली की गड़गड़ाहट, तेज हवाओं की छवि आती है। तूफान जैसा शब्द हमेशा तबाही और बर्बादी का सूचक होता है। लेकिन क्या आपने कभी सौर तूफान (Solar Storm) के बारे में सुना है? सौर यानी कि सूर्य की ऊर्जा। लेकिन सूरज की ऊर्जा से आखिर किस तरह का तूफान आता है?  यह समझना थोड़ा मुश्किल है।

लेकिन वर्तमान में आपको समय-समय पर अखबार, टेलीविजन में सौर तूफान से संबंधित खबरें दिखाई दे रही होंगी। कुछ समय पहले यह अटकलें लगाई जा रही थी कि पृथ्वी की सतह से सौर तूफान टकराएगा उससे कई मुसीबतें पैदा होंगी। 

हालांकि, बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्हें यह नहीं पता कि आखिर यह सौर तूफान क्या होता है? ऐसे में इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि सौर तूफान क्या होता है? तथा यह कैसे पैदा होता है? सौर तूफान का पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है? और सौर तूफान इतिहास में कबकब आया। 

दरअसल, सौर तूफान यानी कि सूर्य की सतह से उत्पन्न हुआ तूफान, सौर तूफान मुख्यतः सूर्य के वायुमंडल से उत्पन्न होते हैं। इसी सौर तूफान की वजह से Geomagnetic Storm पैदा होता हैं, जो कि सौर तूफान का एक प्रकार है। यह तूफान तब आता है जब सूरज के Charged Particles पृथ्वी की सतह में मौजूद चुंबकीय क्षेत्र को छूते हैं।

इनके पृथ्वी की सतह से टकराने पर Geomagnetic तूफ़ान पैदा हो जाता है जिस वजह से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में गड़बड़ी होती है। आइए सौर तूफान के बारे में विस्तार से जानते हैं:-

सौर तूफान क्या है तथा यह कैसे पैदा होता है? (What is Solar Storm & How does it arise?)

सौर तूफान शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है जब सूर्य के प्रभाव से पृथ्वी पर कुछ घटनाओं को महसूस किया जाता है। सूर्य पिघली हुई गैसों का एक चमकदार गोला है जिसमें लगातार प्रवाह होता रहता है। सौर तूफान तब आता है जब सूर्य के द्वारा सौर ज्वालाओं (Solar Flares) और Coronal Mass के रूप में विशाल विस्फोटक ऊर्जा का उत्सर्जन किया जाता है। इनकी वजह से पृथ्वी की ओर 3 मिलियन मील प्रति घंटा की रफ्तार से विद्युतीय आवेश (Electrical Charges) और चुंबकीय क्षेत्रों (Magnetic Field) की धारा निकलती है। 

जब यही सौर तूफान पृथ्वी की सतह से टकराता है तब पृथ्वी के कुछ हिस्सों में तेज़ चमकदार रोशनी दिखाई देती है। इस रोशनी को आर्कटिक सर्कल के नजदीकी क्षेत्रों में आसानी से देखा जा सकता है। इस सौर तूफान के कारण ही विभिन्न उपग्रह तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार के अलग-अलग माध्यम प्रभावित हो जाते हैं।

सौर तूफान के प्रकार (Types of Solar Storm in Hindi)

सौर तूफान कई प्रकार के होते हैं और इसके अलग-अलग प्रकारों ने समय-समय पर पृथ्वी की गतिविधियों को प्रभावित किया है। आइए जानते हैं सौर तूफान के प्रकारों के बारे में:-

  • Solar Flare:
    सूर्य के वातावरण में मौजूद चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं के आपस में उलझने, पुनर्गठित होने की वजह से ऊर्जा का अचानक विस्फोट होता है जिससे सोलरफ्लेयर के नाम से जाना जाता है।

  • Coronal Mass Ejection (CME):
    सूर्य से सुपरहिटेड गैस के बुलबुले जिन्हें प्लाज्मा के नाम से जाना जाता है, बाहर निकलते रहते है। यह प्रकिया दिन में कई बार होती है। जब सूरज सबसे ज्यादा सक्रिय होता है तब सूर्य के Coronal से ऊर्जा का जबरदस्त विस्फोट होता है, तो इसे कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejection) के रूप में जाना जाता है। इसकी वजह से भू-चुंबकीय क्षेत्र में व्यधान उत्पन्न हो जाते हैं।

  • Geomagnetic Storm:
    पृथ्वी के चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र के साथ सूर्य का विस्फोट भू-चुंबकीय तूफान के नाम से जाना जाता है।

यह थे सौर तूफान के कुछ प्रकार। अब आइए जानते हैं कि सौर तूफान का पृथ्वी पर क्या-क्या प्रभाव पड़ता है।

सौर तूफान का पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है? (Effects of Solar Storms on Earth)

सौर तूफान का पृथ्वी के वायुमंडल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से कई समस्याएं सामने आती है। जब सौर तूफान आता है तब वायुमंडल का तापमान बढ़ जाता है जिसका असर सैटेलाइट पर पड़ता है। इससे स्मार्टफोन, जीपीएस नेवीगेशन, सैटेलाइट, टीवी, मोबाइल फोन के सिग्नल समेत कई गड़बड़ी पैदा हो जाती है। जीपीएस सिगनल पर इसका प्रभाव पड़ने की वजह से ही जो विमान जीपीएस के सहारे चलते हैं, उन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। 

इसके अलावा बिजली की आपूर्ति भी बाधित हो जाती है। वहीं कई बार इसके उलट भी प्रभाव देखने को मिलता है जब बिजली तेज हो जाती है और इससे ट्रांसफॉमर्स उड़ने की संभावनाएं बनी रहती है।

हालांकि सौर तूफान से इस तरह की समस्याएं आने की संभावनाएं कम होती है क्योंकि पृथ्वी के चारों और चुंबकीय क्षेत्र है जो कि इसके सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है और सौर तूफान से इसकी रक्षा करता है।

सौर तूफान का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (Historical Perspective of Solar Storms)

इससे पहले भी इतिहास में कई बार सौर तूफान आए हैं जिससे छोटे से बड़े स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ा है। आइए इतिहास पर गौर करें जब सौर तूफान ने विश्व के अलग-अलग देशों में समस्याएं उत्पन्न की:-

  • साल 1859 में Geomagnetic तूफान आया जो कि अब तक का सबसे भयावह तूफान माना जाता है। यह तूफान 2 सितंबर 1859 में आया था। जैसा कि आप जानते हैं उस दौरान स्मार्टफोन, सैटेलाइट, बिजली आदि नहीं हुआ करती थी लेकिन इस तूफान ने यूरोप और अमेरिका के Electrical Telegraph Network को बर्बाद कर दिया। 

    इस तूफान की वजह से वहां के ऑपरेटर्स को झटके भी लगे। इसमें सबसे अजीब बात यह सामने आई कि इस दौरान कई लोग बिना बैटरी के ही अपने उपकरणों का इस्तेमाल कर पा रहे थे। जरा सोचिए कि यदि यह तूफान वर्तमान समय में आया होता तो यह कितना खतरनाक साबित हो सकता था क्योंकि वर्तमान में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं तथा बिजली का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। यानी कि यह तूफान बहुत बड़ी मात्रा में तबाही पैदा कर सकता था।
  • 13 मार्च 1989 में पृथ्वी को सौर तूफान को झेलना पड़ा था। इस तूफान के कारण ही Canada के एक शहर क्यूबेक (Quebec City) में 9 घंटे बिजली चली गई। जिस वजह से वहां की आबादी को मुश्किलें झेलनी पड़ी। यह तूफान सबसे बड़े सौर तूफानों में से एक था।
  • साल 1991 में भी सौर तूफान की वजह से अमेरिका के अधिकतर क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई थी।

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सबसे बड़े सौर तूफान की वजह से आर्थिक नुकसान 20 गुना ज्यादा हो सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस पोस्ट में हमने जाना कि Solar Storm क्या होता है? सौर तूफान कितने प्रकार का होता हैं?, यह पृथ्वी पर किस तरह से प्रभाव डालता है? तथा इतिहास में कब-कब Solar Storm पृथ्वी पर आया

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद एक बात तो साफ हो चुकी है कि सौर तूफान की वजह से स्मार्टफोन के सिग्नल, GPS, सैटेलाइट प्रभावित होते हैं जिसका सीधा प्रभाव जनजीवन पर पड़ता है। इतिहास में आए सौर तूफान ने उतना ज्यादा प्रभाव नहीं डाला।

लेकिन मौजूदा समय में इसका प्रभाव ज्यादा हो सकता है। हाल ही में सौर तूफान को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थी यह कहा जा रहा था कि यह तूफान 1.6 मिलियन किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर गतिमान है। इसका प्रभाव स्मार्टफोन, जीपीएस से चलने वाले उपकरणों तथा सैटेलाइट पर पड़ सकता है। हालांकि इसे लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

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हमने अपने इस पोस्ट के ज़रिए आपको सौर ऊर्जा से संबंधित सभी जानकारी देने का प्रयास किया है। अगर आपको सौर तूफान से जुड़े किसी अन्य प्रश्न का उत्तर जानना है तो हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।

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Author:

Bharti

भारती, मैं पत्रकारिता की छात्रा हूँ, मुझे लिखना पसंद है क्योंकि शब्दों के ज़रिए मैं खुदको बयां कर सकती हूं।