World Time Zone Journey

What is Time Zone in Hindi
A brief Journey of Time Zone | What is Time Zone in Hindi

A brief Journey of Time Zone- All World Time Zone

पृथ्वी गोल है और यह लगातार अपने अक्ष पर घूमती रहती है। पृथ्वी के किसी एक क्षेत्र में कहीं सुबह हो रही होती है तो किसी दूसरे हिस्से में रात या शाम हो रही होती है। इसके पीछे की वजह यह है कि पृथ्वी के जिस भाग में सूरज की किरणें पड़ती है वहां रोशनी यानी कि दिन का समय हो रहा होता है और जिस हिस्से में सूरज की किरणें नहीं पहुंचती वहां अंधेरा यानी की रात या शाम हो रही होती है। पृथ्वी के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग समय होने के पीछे का क्या कारण है? टाइम जोन क्या है तथा विश्व के अलग-अलग देशों में क्या टाइम जोन है? इन सबके बारे में आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे।

टाइम जोन क्या होता है? (What is Time Zone?)

टाइम जोन को समझने से पहले एक उदाहरण को समझना जरूरी है। मान लीजिए आपके पास एक मोमबत्ती है और उस मोमबत्ती के आगे आपने एक गेंद रखी है। मोमबत्ती का प्रकाश गेंद के जिस हिस्से में पड़ता है, वहां रोशनी होती है। जबकि उसके दूसरे हिस्से में अंधेरा होता है। जहां रोशनी होती है उसे हम दिन कह सकते हैं जबकि जिस हिस्से में अंधकार होता है वह रात होगा।

ऐसा ही पृथ्वी के साथ होता है। पृथ्वी के जिस हिस्से पर सूरज की किरणें पड़ती है वहां पर दिन का समय हो रहा होता है। जहां यह किरणें नहीं पड़ती वहां रात का समय हो रहा होता है। पृथ्वी के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर सूरज की तिरछी किरणें पड़ती है। उस जगह शाम का समय हो रहा होता है। यानी कि पूरे विश्व के अलग-अलग भागों में अलग-अलग समय हो रहा होता है। अगर पूरी दुनिया में एक ही टाइम जोन बना दिया जाए तो बहुत सारी गड़बड़ियां हो जाएंगी क्योंकि किसी स्थान पर जहां 8 बजे सुबह हो रही होगी तो वही किसी जगह रात के 8 बज रहें होंगे। वैज्ञानिकों ने इस अलग-अलग समय से उत्पन्न हो रही समस्या को देखते हुए टाइम जोन बनाने का निर्णय लिया।

टाइम जोन का निर्धारण कैसे होता है? (How Time Zone determined?)

पृथ्वी में 360 देशांतर रेखाएं और 180 अक्षांश रेखाएं हैं। पृथ्वी में किस वक्त क्या समय हो रहा होता है, इसका निर्णय देशांतर रेखाओं (Longitude Lines) के हिसाब से लिया जाता है। अब सवाल यह उठता है कि यह टाइम जोन क्या होता है? दरअसल, जिस क्षेत्र में सभी जगहों पर एक साथ एक ही समय हो रहा होता है वह टाइम जोन कहलाता है। यानी कि जितनी जगहों पर सुबह के 8 बज रहे होते हैं उन सभी जगहों पर एक ही टाइम ज़ोन आएगा। अगर किसी जगह पर रात के 8 बज रहे होंगे वह दूसरा टाइम जोन कहलाएगा।

विश्व भर को देशांतर रेखाओं (Longitude Lines) के आधार पर 15 Degree के अंतर्गत 24 काल्पनिक हिस्सों में बांटा गया है। 0 Degree से समय की गणना शुरू होती है। 0 Degree की शुरुआत इंग्लैंड के ग्रीनविच की एक वेधशाला से होती है। इसे ही अंतरराष्ट्रीय मानक समय यानी कि ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के नाम से जाना जाता है। आगे जाकर इसका नाम बदलकर कॉर्डिनेट यूनिवर्सल टाइम (UTC) कर दिया गया। ग्रीनविच रेखा के दाएं हिस्से वाले समस्त देशों का समय आगे होता है वहीं इस रेखा के बाएं हिस्से वाले समस्त देशों का समय पीछे होता है।

हर देश का अपना मानक समय होता है। भारत में इलाहाबाद के करीब नैनी से ग्रीनविच रेखा गुजरती है। यही स्थान राष्ट्रीय मानक समय माना जाता है। यह समय ग्रीनविच रेखा के 82.5 Degree के दाएं ओर है। ग्रीनविच के मानक समय से भारत का मानक समय 5:30 घंटे ज्यादा है। जब भारत में सुबह के 5:30 हो रहे होंगे उस दौरान ग्रीनविच रेखा के पास रात के 12:00 बज रहे होंगे।

टाइम जोन का इतिहास (History of Time Zone)

टाइम जोन की संकल्पना 19वीं सदी के बाद आई। ऐसे में सवाल उठता है कि इससे पहले विश्व भर में टाइम जोन का निर्धारण कैसे किया जाता था। आपको बता दें, इससे पहले अलग-अलग शहरों में सूर्य के मुताबिक समय का निर्धारण किया जाता था, जिस समय सूर्य आसमान में सबसे ऊंचाई पर दिखाई देता था उस समय को मध्यान्ह माना जाता था। इसी तरह उस क्षेत्र से दूरी पर बसे शहरों का समय अलग-अलग होता था।

1884 में सर सैंडफोर्ड फ्लेमिंग (Sir Sandford Fleming) के द्वारा टाइम जोन को बनाया गया। 1884 में ही मेरिडियन कॉन्फ्रेंस में टाइम जोन का निर्धारण किया गया था जिसमें पूरी दुनिया को 24 टाइम जोन में विभाजित कर दिया गया। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा समय में पूरी दुनिया को 40 टाइम जोन में बांटा गया है।

भारत में टाइम जोन (Time Zone in India)

मौजूदा समय में भारत में एक ही टाइम जोन काम करता है। इसे आजादी के बाद लागू किया गया था। जब देश में ब्रिटिश शासन था उस दौरान भारत को 2 टाइम जोनों में विभाजित किया गया था। मौजूदा समय में भारत में एक टाइम जोन है। लेकिन इसे लेकर भी काफी विवाद है कुछ लोग भारत में दो टाइम जोन रखने की पैरवी करते हैं इसके पीछे की वजह यह है कि भारत के पश्चिम और पूर्वी क्षेत्र में सूर्य के उदय होने के समय में 90 मिनट का अंतर देखा जाता है, लेकिन इन जगहों में एक ही टाइम जोन काम करता है।

पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों का कहना है कि वहां भारत के अन्य हिस्सों के मुकाबले जल्दी सुबह होती है तथा शाम को अंधेरा जल्दी हो जाता है इसीलिए भारत में दो टाइम जोन की जरूरत पर ज़ोर दिया जाता है।

टाइम जोन का वैश्विक परिदृश्य (All World Time Zone)

विश्व भर के तमाम देशों में अलग-अलग टाइम जोन काम करते हैं। किसी-किसी देश में तो 10 से ज्यादा टाइम जोन भी है। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता हैं कि विश्व के ऐसे कौन से पांच देश है जहां सबसे ज्यादा टाइम जोन मौजूद है:-

5 देश जिनमें सबसे ज्यादा टाइम जोन है

  1. फ्रांस (France):- फ्रांस दुनिया का सबसे ज्यादा टाइम जोन वाला देश है। फ्रांस में कुल 12 टाइम जोन है।
  2. अमेरिका (America):- फ्रांस के बाद अमेरिका में सबसे ज्यादा टाइम जोन है। बता दें, अमेरिका में कुल 11 टाइम जोन मौजूद है।
  3. रूस (Russia):- अमेरिका की तरह रूस में भी 11 टाइम जोन है।
  4. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom):- यूनाइटेड किंगडम में कुल 9 टाइम जोन है।
  5. ऑस्ट्रेलिया (Australia):- ऑस्ट्रेलिया दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश माना जाता है। इसमें 9 टाइम जोन है।

विश्व के अन्य देशों में टाइमजोन की संख्या इस प्रकार हैं

  1. अंटार्कटिका – 9
  2. कनाडा – 6
  3. डेनमार्क – 5
  4. न्यूजीलैंड – 5
  5. ब्राजील – 4
  6. मैक्सिको – 4
  7. चिली – 3
  8. इंडोनेशिया – 3
  9. किरिबाती – 3
  10. कांगो गणराज्य – 2
  11. इक्वाडोर – 2
  12. माइक्रोनेशिया के संघीकृत राज्य – 2
  13. कजाकिस्तान – 2
  14. किंगडम ऑफ द नीदरलैंड्स – 2
  15. मंगोलिया – 2
  16. पापुआ न्यू गिनी – 2
  17. पुर्तगाल – 2
  18. साउथ अफ्रीका – 2
  19. स्पेन – 2
  20. यूक्रेन – 2

इसके अलावा विश्व के जितने भी देश है वहां पर एक ही टाइम जोन चलता है।

निष्कर्ष

इस लेख में आपने जाना टाइम जोन का इतिहास, भारत में टाइम जोन तथा विश्व के अन्य देशों के टाइम ज़ोन के बारे में। मान लीजिए विश्व के सभी देशों को यदि टाइम जोन में विभाजित न किया गया होता तो कितनी बडी समस्या पैदा हो सकती थी। वैसे तो भारत में एक ही टाइम जोन है लेकिन लगातार भारत में 2 टाइम जोन की मांग की जा रही है क्योंकि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सुबह और शाम होने में अन्य राज्यों के मुकाबले अंतर पाया जाता है।

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Author:

Bharti

भारती, मैं पत्रकारिता की छात्रा हूँ, मुझे लिखना पसंद है क्योंकि शब्दों के ज़रिए मैं खुदको बयां कर सकती हूं।