HINDI KAVITA: बेगैरत दुनिया

Last updated on: October 22nd, 2020

बेगैरत दुनिया

बहुत मासूम थे अबतक बड़े शातिर बना डाले

बेगैरत ये जहां वाले हमें काफिर बना डाले

जला कर घर मेरा देखो वो कैसे थे शितम ढाये

जकड कर बेड़ियों से तो हमें नाज़िर बना डाले

बस्तियां उजड़ी हैं जब भी मज़लूमों का तो

कहीं गिरजा कहीं मस्जिद कहीं मंदिर बना डाले

बस यही शिकवा रहा तेरे मसीहा से

कैसे कैसे को यहां कादिर बना डाले

अब हालातें मोड़ दो “काजू” कलम से तुम

इत्तिफाकन ने तुझे नासिर बना डाले।

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काजू निषाद गोरखपुर राजधानी